Hello Friends,
Today Important Word for news reading
1.Derailment - पटरी से उतारना
2. Devastating - भयानक , दिल दहलानेवाला
3. Torment - यातना , कष्ट
4. Hike - बढ़ोतरी
5. Inflation - मुद्रास्फीति
6. Impetus - प्रेरणा , प्रोत्साहन
Hello Friends,
Today Important Word for news reading
1.Derailment - पटरी से उतारना
2. Devastating - भयानक , दिल दहलानेवाला
3. Torment - यातना , कष्ट
4. Hike - बढ़ोतरी
5. Inflation - मुद्रास्फीति
6. Impetus - प्रेरणा , प्रोत्साहन
HELLO FRIENDS,
KVS RECRUITMENT 2022 के अंदर भरे गए नॉन टीचिंग स्टाफ के एडमिट कार्ड आ चुके है जिस किसी ने भी फॉर्म भरे थे वो अपने एडमिट कार्ड नीचे दिए हुए लिंक से डाउनलोड कर ले
परीक्षा तिथि - 20 से 26 मार्च 2022 तक
SELECTION PROCESS - THREE STAGES FOR KVS EXAM
ADMIT CARD FOR KVS NON TEACHING STAFF DOWNLOAD
CLICK ON BLUE LINE YOU CAN DOWNLOAD DIRECT YOUR ADMIT CARD
THANS FRIEND
PLEASE COMMENT SHARE AND SUBSCRIBE
महाराणा प्रताप ने 11 शादियां की थी उनकी पत्नियों और पुत्र पुत्रियों के नाम-:
महारानी अजब्दे पवार- अमर सिंह और भगवान दास
अमर बाई राठौर- नत्था
शहमति बाई हाडा- पुरा
आलम दे बाई चौहान- जसवंत सिंह
रत्नावती बाई परमार- माल, गज
लखाबाई- राय भाना
जसो बाई चौहान- कल्याण दास
चंपा बाई जन्थी- कल्ला सनवाल दास और दुर्जन सिंह
सोलंखिनी पुर बाई- सासा और गोपाल
फूल बाई राठौर- चंदा और शिखा
खिचर आशाबाई- हत्थी और राम सिंह
महाराणा प्रताप ने भगवान एकलिंग की सौगंध खाकर प्रतिज्ञा ली थी कि जिंदगी भर उनके मुख से अकबर के लिए सिर्फ तर्क ही निकलेगा। और वह कभी अकबर को अपना राजा नहीं स्वीकार करेंगे।
महाराणा प्रताप का सबसे प्रिय घोड़ा चेतक था। जो महाराणा प्रताप की तरह काफी बहादुर था। युद्ध के दौरान जब मुगल सेना उनके पीछे थी तब चेतक ने महाराणा प्रताप को अपने पीठ पर बिठाकर कई फीट लंबे नाले को पार किया था। परंतु अंत में गंभीर रूप से घायल होने के कारण चेतक मारा गया था। चित्तौड़ में आज भी चेतक की समाधि बनी हुई है।
महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक गोगुंदा में हुआ था। महाराणा प्रताप के पिता उदय सिंह अकबर के डर के कारण मेवाड़ त्याग कर अरावली पर्वत पर डेरा डाल लिया था। और उदयपुर को नई राजधानी बनाया एवं मेवाड़ भी उन्हीं के अधीन था। महाराणा उदय सिंह ने अपने छोटे बेटे जगमाल को मेवाड़ का उत्तराधिकारी बना दिया जिसकी वजह से मेवाड़ की जनता उनके विरोध में आ गई क्योंकि प्रजा तो महाराणा प्रताप सिंह को पसंद करती थी।
जगमाल ने राज्य का शासन हाथ में लेते ही घमंड के कारण प्रजा पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। यह सब देखकर महाराणा प्रताप जगमाल को समझाने का प्रयास किया कि अत्याचार करके प्रजा को परेशान मत करो। इस राज्य का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
![]() |
परंतु जगमाल को यह बात अपनी शान के खिलाफ लगा इसी कारण जगमाल ने महाराणा प्रताप सिंह को राज्य की सीमा से बाहर चले जाने का आदेश दे दिया। महाराणा प्रताप अपने घोड़े चेतक के साथ वहां से चले गए।
![]() |
मुगल सम्राट अकबर बिना युद्ध के ही महाराणा प्रताप को अपने अधीन करना चाहता था। इसीलिए अकबर ने महाराणा प्रताप को समझाने के लिए राजपूतों को उनके पास भेजा लेकिन महाराणा प्रताप ने अकबर के प्रस्ताव को इनकार कर दिया। जिसका परिणाम स्वरूप हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध को देखने को मिला।
हल्दीघाटी का युद्ध अकबर और महाराणा प्रताप के बीच 18 जून सन् 1576 को हुआ था। यह युद्ध महाभारत के युद्ध की तरह भयानक और विनाशकारी था। इस युद्ध में न तो अकबर जीत सका और ना ही महाराणा प्रताप। क्योंकि मुगलों के पास सैन्य शक्ति अधिक थी और महाराणा प्रताप के पास जुझारू शक्ति की कमी नहीं थी।
हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के पास सिर्फ 20000 सैनिक थे। और अकबर के पास पचासी हजार सैनिक थे। फिर भी महाराणा प्रताप ने हार नहीं मानी और संघर्ष करते रहे।
महाराणा प्रताप का कवच 72 किलोग्राम और भाला 81 किलोग्राम का था। उनका भाला, कवच, ढाल और तलवार का वजन कुल मिलाकर 208 किलोग्राम का था। महाराणा उदयसिंह की मृत्यु के बाद में मेवाड़ के सभी सरदारों ने एकत्रित होकर महाराणा प्रताप सिंह को राजगद्दी पर बैठा दिया।
राजस्थान के इतिहास में सन् 1582 में दिवेर छापली छापली का युद्ध एक महत्वपूर्ण युद्ध माना जाता है क्योंकि इस युद्ध में महाराणा प्रताप के खोए हुए राज्य पुनः प्राप्त हुए थे। तथा महाराणा प्रताप सिंह और मुगलों के बीच एक बहुत लंबा संघर्ष युद्ध के रूप में हुआ था।
महाराणा प्रताप का सबसे बड़ा शत्रु अकबर था। परंतु इन दोनों की लड़ाई कोई व्यक्तिगत लड़ाई नहीं थी। जबकि यह लड़ाई उनके अपने सिद्धांतों और मूल्यों की थी। अकबर अपने राज्य का विस्तार करना चाहता था जबकि महाराणा प्रताप अपने मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए संघर्ष कर रहा था।
महाराणा प्रताप की मृत्यु पर अकबर बहुत दुखी हुआ था। क्योंकि वह मन से महाराणा प्रताप के गुणों की प्रशंसा करता था। और वह यह भी कहता था कि महाराणा प्रताप जैसा वीर इस धरती पर दूसरा नहीं है। महाराणा प्रताप की मृत्यु का समाचार सुनकर अकबर महान हो गया था। और उसकी आंखों में आंसू भर आए थे।
अकबर महाराणा प्रताप का सबसे बड़ा शत्रु था, पर उनकी यह लड़ाई कोई व्यक्तिगत द्वेष का परिणाम नहीं थी, बल्कि अपने सिद्धान्तों और मूल्यों की लड़ाई थी। एक वह था जो अपने क्रूर साम्राज्य का विस्तार करना चाहता था, जब की एक तरफ महाराणा प्रताप जी थे जो अपनी भारत मातृभूमि की स्वाधीनता के लिए संघर्ष कर रहे थे। महाराणा प्रताप की मृत्यु 19 जनवरी 1597 (उम्र 56) चावण्ड, मेवाड़ (वर्तमान में:चावंड, उदयपुर जिला, राजस्थान, भारत) में हुई जिस पर अकबर को बहुत दुःख हुआ क्योंकि ह्रदय से वो महाराणा प्रताप के गुणों का प्रशंसक था और अकबर जनता था की महाराणा प्रतात जैसा वीर कोई नहीं है इस धरती पर। यह समाचार सुन अकबर रहस्यमय तरीके से मौन हो गया और उसकी आँख में आँसू आ गए।
महाराणा प्रताप के स्वर्गावसान के समय अकबर लाहौर में था और वहीं उसे सूचना मिली कि महाराणा प्रताप की मृत्यु हो गई है।
मई महा के राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय दिवस
1st May अन्तराष्ट्रीय शार्मिक दिवस , महाराष्ट्र दिवस
3rd May विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस
8th May विश्व प्रवासी पक्षी दिवस , विश्व रेड क्रॉस दिवस
11th May राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस
12th May विश्व नर्स दिवस
15th May विश्व परिवार दिवस
17th May विश्व दूरसंचार दिवस
18th May विश्व संग्रहालय दिवस
21st May राष्ट्रीय आतंकवादी विरोधी दिवस
29th May अंतराष्ट्रीय माउन्ट एवेरेस्ट दिवस
31st May विश्व तम्बाकू रोधी दिवस
19 मार्च , 2025 राम राम मेरे सभी दोस्तों को , आज इन्टरनेट का जमाना है बच्चा बच्चा जानता है इन्टनेट चलाना ऑनलाइन पेमेंट कैसे करते है ऑनलाइन...